मध्य प्रदेशविचार

शिवराज सिंह चौहान की अगुआई में अव्वल बना मध्यप्रदेश

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5 मार्च जन्मदिवस पर विशेष

डॉ. एच.एल. चौधरी

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भोपाल। कुछ साल पहले तक बीमारू प्रदेशों की कतार में शुमार किये जाने वाले मध्यप्रदेश की पहचान अब तेजी से विकास करने वाले प्रदेश के रूप में होती है। यह अब कई क्षेत्रों में देश में अगुआ और अव्वल भी बन गया है।

एक दशक में हुए इस चमत्कार के पीछे प्रदेश की तरक्की के प्रति श्री शिवराज सिंह चौहान का संकल्प और समर्पण है। उन्होंने शुरू में ही जनता के बीच इस रूप में यह जाहिर कर दिया था कि ‘मध्यप्रदेश उनका मंदिर है, जिसमें रहने वाली साढ़े सात करोड़ जनता उनकी भगवान है और उसका पुजारी शिवराज सिंह चौहान हैं’। मध्यप्रदेश को देश का नम्बर एक राज्य बनाऊँगा। इन दोनों बातों की गंभीरता को उस समय लोगों ने भले ही कम समझा हो, लेकिन आज जब यह सब चरितार्थ होते दिख रहा है, तब लोगों में उनके प्रति विश्वास और प्रगाढ़ हुआ है। प्रदेश में हुए अद् भुत कामों की गूँज न केवल देश में बल्कि दूर देशों तक सुनाई दे रही है।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के मुख से निकली इन दोनों बातों में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का ताना-बाना बुना है। एक दशक से प्रदेश का नेतृत्व करने वाले श्री चौहान को आज भी जनता अपने सबसे नजदीक पाती है तो उनकी सादगी, विनम्रता और सहजता है। यही गुण उन्हें औरों से अलग करते हैं। सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि के किसान परिवार में जन्में श्री चौहान को किसी भी प्रकार का बनावटीपन और अहम दूर-दूर तक छू नहीं सका है। उन्होंने जो कहा वो किया। जनता की सुख-समृद्धि के लिये ठोस कार्यक्रम बनाये और उन्हें जमीन पर उतारा भी। उन्होंने प्रदेश के पिछड़ेपन को दूर करने के लिये हर वर्ग के उत्थान की योजनाएँ बनायी तथा प्रदेश के ढाँचागत विकास को प्राथमिकता दी।

प्रदेश के किसानों को खुशहाल बनाने के लिये खेती को लाभकारी धंधा बनाने का संकल्प लिया। इस दिशा में उन्होंने कृषि की लागत को कम और पैदावार को वाजिब दाम दिलवाने के ठोस कदम उठाये। देश में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण देने और मूलधन की वसूली दस फीसदी कम करने वाला एकमात्र राज्य मध्यप्रदेश है। इससे कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की गई। प्रदेश को लगातार चार बार कृषि कर्मण पुरस्कार से नवाजा गया है।

प्रदेश, महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिये स्थानीय निकायों में पचास फीसदी आरक्षण देने में भी अग्रणी है। वैसे तो बेटियों के जन्म से लेकर पोषण, शिक्षा, विवाह, रोजगार आदि का पूरा इंतजाम किया है। समाज की अंतिम पंक्ति के व्यक्तियों के जीवन को सुखमय बनाने के लिये उन्होंने कामगारों, रिक्शा और हाथठेला चालकों, तुलावटी, हम्माल, शहरी घरेलू काम-काजी महिलाओं आदि निर्धन वर्ग के कल्याण तथा सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यक्रम लागू किये हैं।

श्री चौहान की विकास एवं जनोन्मुखी सोच, संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत प्रदेश में सिंचाई, सड़क एवं बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुशासन के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की गई है। वर्ष 2003 में प्रदेश जहाँ अत्यंत पिछड़ा राज्य था, वहीं आज देश के अग्रणी राज्यों की कतार में शामिल है तो इस दौरान किये गये कार्य ही हैं। उस समय विद्युत उत्पादन मात्र 5173 मेगावॉट था, आज 16 हजार 116 मेगावॉट हो गया है। सिंचाई का रकबा साढ़े सात लाख हेक्टेयर था, जो आज बढ़कर 36 लाख हेक्टेयर हो गया है। गेहूँ का उत्पादन मात्र 73.65 मीट्रिक टन था, जो आज 184.80 लाख मीट्रिक टन हो गया है। वर्ष 2003 में सकल घरेलू उत्पाद 1,02,839 करोड़ था जो आज बढ़कर 5,08,006 करोड़ हो गया है।

श्री चौहान के चमत्कारिक नेतृत्व में मध्यप्रदेश आज देश में विभिन्न क्षेत्रों में पहले स्थान पर है। चाहे कृषि विकास दर हो, जैविक खेती का क्षेत्र हो, दलहन उत्पादन, सोयाबीन, तिलहन, प्रमाणित बीज, चना, औषधि एवं सुगंधित फसलों के उत्पादन, लहसुन, अमरूद और मटर उत्पादन, पीपीपी मॉडल में स्टील सायलो की स्थापना, इलेक्ट्रॉनिक उपार्जन व्यवस्था, खेती के लिये प्रतिदिन 10 घण्टे गुणवत्तापूर्ण बिजली प्रदाय में प्रथम है।

इसी तरह पीपीपी मोड में देश में सबसे अधिक सड़कों का निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में देश में सबसे ज्यादा सड़कों का निर्माण, दस्तावेजों का ऑनलाइन पंजीयन और ई-स्टॉम्पिंग, सबसे ज्यादा तीन शहरों का स्मार्ट सिटी का चयन, नि:शक्त विवाह प्रोत्साहन योजना लागू करने, बहु-विकलांग एवं मानसिक रूप से नि:शक्त व्यक्ति को आर्थिक सहायता देने की योजना प्रारंभ करने, मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना लागू करने, लोक सेवा गारण्टी कानून बनाने, सीएम हेल्प लाइन जैसा कॉल सेन्टर प्रारंभ करने आदि क्षेत्रों में भी अव्वल है।

श्री शिवराज सिंह चौहान की अगुआई में मध्यप्रदेश की चहुँदिशा तरक्की की इबारत लिखी जा रही है। इससे प्रदेश की तकदीर और तस्वीर बदल रही है।

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